कृपया अपने बहुमूल्य विचार अवश्य व्यक्त करें
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Thursday, February 26, 2009
फिर आया फागुन
फिर आया फागुन
फिर आया फागुन
रंगों की बहार लाया
गुब्बारे पिचकारी
गुझिया चकली
प्रेम प्यार
बढाने
आया
बेला जूही पलाश महके
अंग अंग में मस्ती छलके
अब तुम भी आ जाओ
मोहे पीली चुनरी दिला जाओ
फिर आया फागुन
फिर आया फागुन
तुम
भी आ जाओ
२०/०२/०९
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