कृपया अपने बहुमूल्य विचार अवश्य व्यक्त करें
Showing posts with label
फूल
.
Show all posts
Showing posts with label
फूल
.
Show all posts
Monday, April 13, 2009
तुम्हारी याद
बसंती हवा सी
अल्हड
बे खौफ
मदमस्त
चली आती है
याद तुम्हारी
महका जाती है
सांसें हमारी
बहुत मुश्किल है
समझ
पाना
कौन ज़्यादा
महकता है
तुम्हारे लाये
रजनीगंधा के फूल
या फ़िर
याद तुम्हारी
१३/०४/०९
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)