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Tuesday, July 2, 2013
अजनबी शहर, अजनबी लोग
ये कहाँ आ गए हम
एक अजनबी से शहर में
अन्जाना शहर
अन्जाने लोग
पहचाने से चेहरे
पर बेगाने लोग
हमदर्द बनकर
दिल दुखते लोग
दर्द देकर
मुस्कुराते लोग
रिश्तों में इतने फासले
फासलों के दरम्यान भी हैं द्रूरियां
सबके चेहरों पर हैं मुखोटे कई
रोज़ दिखते हैं रंग कई
जाने कैसे कैसे आजमाते लोग
हर पल में बदल जाते लोग
ये कहाँ आ गए हम
एक अजनबी से शहर मे….
© मधु अरोरा
३०/ ०७/ २०१३
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