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Tuesday, July 2, 2013
अजनबी शहर, अजनबी लोग
ये कहाँ आ गए हम
एक अजनबी से शहर में
अन्जाना शहर
अन्जाने लोग
पहचाने से चेहरे
पर बेगाने लोग
हमदर्द बनकर
दिल दुखते लोग
दर्द देकर
मुस्कुराते लोग
रिश्तों में इतने फासले
फासलों के दरम्यान भी हैं द्रूरियां
सबके चेहरों पर हैं मुखोटे कई
रोज़ दिखते हैं रंग कई
जाने कैसे कैसे आजमाते लोग
हर पल में बदल जाते लोग
ये कहाँ आ गए हम
एक अजनबी से शहर मे….
© मधु अरोरा
३०/ ०७/ २०१३
Tuesday, December 4, 2012
अपना अपना दर्द
कोई टूट कर चाहता है
कोई टूट कर बिखर जाता है
अपना अपना दर्द है
अपना अपना तरीका
कोई सिमट जाता है
कोई बिखर जाता है
© मधु अरोरा
2/12/12
Thursday, October 4, 2012
मुझे एहसास रहने दो...
न पोंछो आंसू मेरे
न मेरा दर्द बांटो तुम
मैं जिंदा हूँ अभी
मुझे एहसास रहने दो
आँखों में हलचल है
अभी कुछ अश्क बाकी हैं
सीने में धड़कन है
अभी कुछ साँस बाकी है
मुमकिन है तेरे दिल में
कोई अरमान बाकी हो
कोई खेल अधूरा हो
कोई हिसाब बाकी हो
कुछ काम बाकी हैं
कुछ फ़र्ज़ बाकी हैं
धरती का सीना है छोटा
कफ़न से बदन की दूरी बाकी है
जाने भी दो छोड़ो
अब ये बात रहने दो
मैं जिंदा हूँ अभी
मुझे एहसास रहने दो
© मधु अरोरा
३०/९/२०१२
Saturday, June 2, 2012
Friday, June 3, 2011
Tuesday, February 24, 2009
भुला न सकोगे

भुला न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं अक्सर तुम्हें याद आती रहूंगी
कभी ख्वाब बनकर कभी चाँद बनकर
मैं रातें तुम्हारी सजाती रहूंगी
मैं अक्सर तुम्हें याद आती रहूंगी
कभी ख्वाब बनकर कभी चाँद बनकर
मैं रातें तुम्हारी सजाती रहूंगी
पकड़ न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं खुशबु सी फिजा में बिखर जाती रहूँगी
कभी साँस बनकर कभी हवा बनकर
मैं सांसें तुम्हारी सजाती रहूंगी
पा न सकोगे मुझे जीवन में तुम
मैं बार बार तुम्हें सताती रहूंगी
कभी दर्द बनकर कभी खुशी बनकर
मैं जीवन तुम्हारा महकाती रहूंगी
१०/०२/२००९
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