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Tuesday, July 2, 2013

अजनबी शहर, अजनबी लोग


















ये कहाँ आ गए हम 
एक अजनबी से शहर में 

अन्जाना शहर
अन्जाने लोग 

पहचाने से चेहरे 
पर बेगाने लोग 

हमदर्द बनकर 
दिल दुखते लोग 

दर्द देकर 
मुस्कुराते लोग 

रिश्तों में इतने फासले 
फासलों के दरम्यान भी हैं द्रूरियां 

सबके चेहरों पर हैं मुखोटे कई 
रोज़ दिखते हैं रंग कई 

जाने कैसे कैसे आजमाते लोग 
हर पल में बदल जाते लोग 

ये कहाँ आ गए हम 
एक अजनबी से शहर मे…. 

© मधु अरोरा 
३०/ ०७/ २०१३ 

Friday, December 18, 2009

फासले



रिश्तों को दरम्यान
कुछ फासले हो गए हैं
कभी तुम दूर थे
आज हम हो गए हैं
जो कल तक कहते थे
जी ना सकेंगे
आज खुद हमसे
जुदा हो गए हैं
ना जीने की तमन्ना है
ना मरने का गम
आज हम कैसे
इन्सान हो गए हैं
०१/०४/२००९