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Saturday, June 2, 2012
Saturday, March 31, 2012
इक रोज़
गुजरते वक़्त के साथ मैं भी
इक रोज़ चली ही जाउंगी
सुनो, मेरे जाने के बाद
किसे दिखाओगे, वो तस्वीरें
जिन्हें संभाले रखे हो
अक्सर महरूम हूँ
मैं जिस आवाज़ से
किसे सुनाओगे , वो आवाज़
जिसे चुप करवाते हो
अपनी ख़ामोशी से
रात भर जागती हैं
जो दो आँखें
तुम्हारे इंतज़ार में
बंद हो जाएँगी, वो कभी
फिर किसे इंतज़ार करवाओगे
२४/२/२०१२
मधु अरोरा
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इक रोज़,
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जाने के बाद,
वक़्त
Monday, September 12, 2011
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