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Monday, September 12, 2011

तुम्हारी तस्वीर

जानती हूँ 
तस्वीरें कभी बोलती नहीं
फिर भी
जी चाहता है
इन्ही तस्वीरों से
कभी निकल आओ तुम
हँसते
बोलते
मुस्कुराते
गुनगुनाते हुए
बैठी हूँ
तुम्हारे इसी इंतज़ार में मैं
१२/०७/२०११ 

Tuesday, February 24, 2009

भुला न सकोगे




भुला न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं अक्सर तुम्हें याद आती रहूंगी
कभी ख्वाब बनकर कभी चाँद बनकर
मैं रातें तुम्हारी सजाती रहूंगी

पकड़ न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं खुशबु सी फिजा में बिखर जाती रहूँगी
कभी साँस बनकर कभी हवा बनकर
मैं सांसें तुम्हारी सजाती रहूंगी

पा न सकोगे मुझे जीवन में तुम
मैं बार बार तुम्हें सताती रहूंगी
कभी दर्द बनकर कभी खुशी बनकर
मैं जीवन तुम्हारा महकाती रहूंगी
१०/०२/२००९