Showing posts with label गगन. Show all posts
Showing posts with label गगन. Show all posts

Friday, June 15, 2012

तू और मैं


























तू पानी
मैं प्यास ज़मीं की
बूँद बूँद मुझे
तुझमे समां जाने दे

मैं जेठ की तपती धूप 
तू छाँव दरख्तों की
मुझको तुझमे
पनाह लेने दे

तू गगन
मैं बादल तेरा
अपने रूप में मुझको
ढल जाने दे

तू चाँद
मैं चांदनी तेरी
मुझे तुझसे
निखर जाने दे

तू जिस्म
मैं रूह तेरी
मुझको तुझ से
मिल जाने दे

मधु अरोरा
१५/६/१२