कृपया अपने बहुमूल्य विचार अवश्य व्यक्त करें
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चांदनी
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Friday, June 15, 2012
तू और मैं
तू पानी
मैं प्यास ज़मीं की
बूँद बूँद मुझे
तुझमे समां जाने दे
मैं जेठ की तपती धूप
तू छाँव दरख्तों की
मुझको तुझमे
पनाह लेने दे
तू गगन
मैं बादल तेरा
अपने रूप में मुझको
ढल जाने दे
तू चाँद
मैं चांदनी तेरी
मुझे तुझसे
निखर जाने दे
तू जिस्म
मैं रूह तेरी
मुझको तुझ से
मिल जाने दे
मधु अरोरा
१५/६/१२
Tuesday, December 20, 2011
कल रात
कल रात भी चाँद आया था जमीं
पर
अनंत खुशियों की रौशनी लेकर,
थी चांदनी कहीं पर
पर मेरे आँगन में सिर्फ अँधेरा था
२०/१२/२०११
मधु अरोरा
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