तू पानी
मैं प्यास ज़मीं की
बूँद बूँद मुझे
तुझमे समां जाने दे
मैं जेठ की तपती धूप
तू छाँव दरख्तों की
मुझको तुझमे
पनाह लेने दे
तू गगन
मैं बादल तेरा
अपने रूप में मुझको
ढल जाने दे
तू चाँद
मैं चांदनी तेरी
मुझे तुझसे
निखर जाने दे
तू जिस्म
मैं रूह तेरी
मुझको तुझ से
मिल जाने दे
मधु अरोरा
१५/६/१२
तमाम रात जाग कर
पलकों की किनोरों से
चाँद तारों पर
तुम्हारा नाम लिखा
सुबह हुई
धूप खिली
देखा तो सब धुल गया
२५/५/२०१२
मधु अरोरा