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Tuesday, February 24, 2009

भुला न सकोगे




भुला न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं अक्सर तुम्हें याद आती रहूंगी
कभी ख्वाब बनकर कभी चाँद बनकर
मैं रातें तुम्हारी सजाती रहूंगी

पकड़ न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं खुशबु सी फिजा में बिखर जाती रहूँगी
कभी साँस बनकर कभी हवा बनकर
मैं सांसें तुम्हारी सजाती रहूंगी

पा न सकोगे मुझे जीवन में तुम
मैं बार बार तुम्हें सताती रहूंगी
कभी दर्द बनकर कभी खुशी बनकर
मैं जीवन तुम्हारा महकाती रहूंगी
१०/०२/२००९

Monday, September 29, 2008

डरते हैं




प्यार हम तुझे
शिद्दत से करते हैं
तुझसे नही
अपनी खुशी से डरते हैं
वक्त के तकाजोंसे
डर लगता है

इस लिए तुझे
मिलने से डरते हैं
देखे हैं तपते
रेगिस्तान ज़िन्दगी के
अब आँधियों से डरते हैं
देखे हैं
हजारों गम हमने
अब तो खुशियों से भी
डरते हैं
२९/०९/२००८

Sunday, July 15, 2007

अपनी ख़ुशी के लिए




कहीँ मिलता है सूरज
उमर भर के लिए


किसी को मयस्सर नही
किरण भी जिन्दगी के लिए
कोई हँसता है तो
निकल आते हैं आंसू
किसी के पास सिर्फ आंसू
उम्र भर के लिए
लगता नही किसी का दिल
अकेले में
किसी के नसीब में है
सिर्फ अकेलापन
हर घड़ी के लिए
कोई सजाता है महफ़िलें
अपनी ख़ुशी के लिए
कोई बचता है महफिलों से
अपनी ख़ुशी के लिए
२१/६/२००७