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Wednesday, October 8, 2014

काश.......


















काश.......

ऐ काश कोई ऐसी ताबीर हो जाये 
तुझे सोचूं और तुझे खबर हो जाये 

जब भी खोलूं मैं आँखें मेरी 
तू सामने नज़र आये 

मैं मुस्कुराऊ
तो तू मेरे साथ खिलखिलाए 

मैं गुनगुनाऊँ 
तो तू मेरे साथ में गाये 

मैं रोऊँ तो तेरे हाथ 
मेरे आंसू पोंछें 

नींद में जब भी बोझल हों आँखें 
सोने को तेरा कांधा मिल जाये 

कभी जो चाहे तू छोड़ के जाना 
उस से पहले मुझे मौत आ जाये 

© मधु अरोरा
७/१०/१४

Tuesday, February 24, 2009

भुला न सकोगे




भुला न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं अक्सर तुम्हें याद आती रहूंगी
कभी ख्वाब बनकर कभी चाँद बनकर
मैं रातें तुम्हारी सजाती रहूंगी

पकड़ न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं खुशबु सी फिजा में बिखर जाती रहूँगी
कभी साँस बनकर कभी हवा बनकर
मैं सांसें तुम्हारी सजाती रहूंगी

पा न सकोगे मुझे जीवन में तुम
मैं बार बार तुम्हें सताती रहूंगी
कभी दर्द बनकर कभी खुशी बनकर
मैं जीवन तुम्हारा महकाती रहूंगी
१०/०२/२००९

Saturday, January 17, 2009

मुश्किल


तुम्हारे मोहपाश में बंधकर
अपना
सब कुछ अर्पण कर
कितना
मुश्किल है
तुम्हें
भुला पाना
पर
उस से भी मुश्किल है
तुम्हें
मेरी याद दिलाना

बहुत
आसान सा है
हर
पल तुम्हें याद कर
तुम्हारे
ख्वाब आना
पर
उस से भी मुश्किल है
हर
रात को
नींद
का आना
१६/०१/२००९