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Friday, May 25, 2012

तुम्हारा नाम


























तमाम रात जाग कर
पलकों की किनोरों से
चाँद तारों पर
तुम्हारा नाम लिखा
सुबह हुई
धूप खिली
देखा तो सब धुल गया

२५/५/२०१२
मधु अरोरा 

Friday, March 16, 2012

ख्वाबों की चादर

















हर रात
तुम्हारे ख्यालों के
सतरंगी धागों से
ख्वाबों की चादर
बुनती हूँ
और फिर
उसी चादर को ओढ़ के
सो जाती हूँ
तुम्हारे ही खवाबों में 
खो जाती हूँ
सुबह होते ही
सब खवाब 
छू हो जाते हैं
मेरे ख्वाबों की चादर
फिर तार - तार हो जाती है
और फिर दिन भर
मैं उन्हें फिर से
बटोरती हूँ
और रात में जब
सब सो जाते हैं
मैं फिर से बुनने लगती हूँ
और फिर से ख्वाब सजाती हूँ
कुछ मेरे लिए
कुछ तुम्हारे लिए

१५/०३/२०१२ 
मधु अरोरा 

Tuesday, December 20, 2011

कल रात



कल रात भी चाँद आया था जमीं पर
अनंत खुशियों की रौशनी लेकर,
थी चांदनी कहीं पर
पर मेरे आँगन में सिर्फ अँधेरा था
२०/१२/२०११
मधु अरोरा 

Tuesday, August 12, 2008

चाँद




ठहरा है चाँद


जवान रात के


सीने पर


आओ कुछ देर


बैठ जायें


जीने पर


कुछ मुस्कुराएँ


कुछ गुनगुनाएं


फिर अपने घर जा


सो जायें


चाँद सिखाता है


यही महीने भर
आओ बैठ जायें


जीने पर


२८/०९/०७