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Wednesday, October 8, 2014

काश.......


















काश.......

ऐ काश कोई ऐसी ताबीर हो जाये 
तुझे सोचूं और तुझे खबर हो जाये 

जब भी खोलूं मैं आँखें मेरी 
तू सामने नज़र आये 

मैं मुस्कुराऊ
तो तू मेरे साथ खिलखिलाए 

मैं गुनगुनाऊँ 
तो तू मेरे साथ में गाये 

मैं रोऊँ तो तेरे हाथ 
मेरे आंसू पोंछें 

नींद में जब भी बोझल हों आँखें 
सोने को तेरा कांधा मिल जाये 

कभी जो चाहे तू छोड़ के जाना 
उस से पहले मुझे मौत आ जाये 

© मधु अरोरा
७/१०/१४

Thursday, October 4, 2012

मुझे एहसास रहने दो...


























न पोंछो आंसू मेरे
न मेरा दर्द बांटो तुम
मैं जिंदा हूँ अभी
मुझे एहसास रहने दो

आँखों में हलचल है
अभी कुछ अश्क बाकी हैं
सीने में धड़कन है
अभी कुछ साँस बाकी है

मुमकिन है तेरे दिल में
कोई अरमान बाकी हो
कोई खेल अधूरा हो
कोई हिसाब बाकी हो

कुछ काम बाकी हैं
कुछ फ़र्ज़ बाकी हैं
धरती का सीना है छोटा
कफ़न से बदन की दूरी बाकी है

जाने भी दो छोड़ो
अब ये बात रहने दो
मैं जिंदा हूँ अभी
मुझे एहसास रहने दो 

© मधु अरोरा
३०/९/२०१२