Friday, May 25, 2012
Monday, May 21, 2012
Saturday, March 31, 2012
इक रोज़
गुजरते वक़्त के साथ मैं भी
इक रोज़ चली ही जाउंगी
सुनो, मेरे जाने के बाद
किसे दिखाओगे, वो तस्वीरें
जिन्हें संभाले रखे हो
अक्सर महरूम हूँ
मैं जिस आवाज़ से
किसे सुनाओगे , वो आवाज़
जिसे चुप करवाते हो
अपनी ख़ामोशी से
रात भर जागती हैं
जो दो आँखें
तुम्हारे इंतज़ार में
बंद हो जाएँगी, वो कभी
फिर किसे इंतज़ार करवाओगे
२४/२/२०१२
मधु अरोरा
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Friday, March 16, 2012
ख्वाबों की चादर
तुम्हारे ख्यालों के
सतरंगी धागों से
ख्वाबों की चादर
बुनती हूँ
और फिर
उसी चादर को ओढ़ के
सो जाती हूँ
तुम्हारे ही खवाबों में
खो जाती हूँ
सुबह होते ही
सब खवाब
छू हो जाते हैं
मेरे ख्वाबों की चादर
फिर तार - तार हो जाती है
और फिर दिन भर
मैं उन्हें फिर से
बटोरती हूँ
और रात में जब
सब सो जाते हैं
मैं फिर से बुनने लगती हूँ
और फिर से ख्वाब सजाती हूँ
कुछ मेरे लिए
कुछ तुम्हारे लिए
१५/०३/२०१२
मधु अरोरा
Saturday, December 31, 2011
नया साल
नया साल बदलने से अगर
और भी कुछ बदल जाता
तारीखें बदलने से अगर
इन्सान बदल जाता
बद्ल जाता वो सब कुछ
जो मानवता के लिए ठीक नहीं है
वो मानव हीनता बदल जाती
वो इन्सान बदल जाता
वो ह्रदय बदल जाता
वो इन्सान बदल जाता
वो नफरत बदल जाती
वो हृदयों की दूरियां
कम हो जाती
वो रिश्ते बदल जाते
जो निभाने मुश्किल हैं
वो संवेदनाएं बदल जाती
वो प्रण बदल जाता
बदल जाती सत्ता देश की
तो प्रगति बदल जाती
तो समझते नया साल ही नहीं
बहुत कुछ बदल गया
सिर्फ तारीखें बदलने से
कुछ नहीं बदल जाता
वो ही है सूरज
और वो ही है दिन
वो ही संवेदनहीन इंसान
वो ही टूटे रिश्तों का बोझ
वो ही दुःख
वो ही समस्याएँ
निरर्थक पीने नाचने से
दुःख नहीं बदल जाता
सिर्फ बधाई देने से
मन नहीं बदल जाता
सिर्फ नया साल आने से
कुछ नहीं बदल जाता
१/१/२०१२
मधु अरोरा
Wednesday, December 21, 2011
Tuesday, December 20, 2011
Friday, December 16, 2011
सच है
जानती हूँ के तुमने मुझे
कभी पुकारा ही नहीं
फिर भी ये सच है
के रह रह के तुम बुलाते हो मुझे
है यकीं मुझे भी
के मैं तुमसे कभी मिली ही नहीं
फिर भी ये सच है
के मैं तुमसे जुदा भी नहीं
ये पागलपन है
या है दीवानापन
हुए हैं वो ही ख्वाब सच
जो हमने कभी बुने ही नहीं
कहने को है दूरी बहुत
या है मज़बूरी बहुत
सच है दिल से कभी
हम दूर हुए ही नहीं
१५/१२/२०११
तुम
मेरा ख्वाब मेरा ख्याल तुम
मेरी सोच मेरा सवाल तुम
मेरा दिन मेरी रात तुम
आफ़ताब( sun) तुम
माहताब (moon) तुम
आगाज़ तुम, अंजाम तुम
मेरी जीत तुम मेरी हार तुम
मेरे अश्क मेरी मुस्कान तुम
मेरी भूख मेरी प्यास तुम
मेरे लफ्ज़ मेरा कलाम तुम
हर लम्हा दिल के पास तुम
मेरी रूह मेरी जान तुम
मेरे जीने का अंदाज़ तुम
हर बात का एहसास तुम
मेरे लिए बहुत खास तुम
हर तरफ बस तुम ही तुम
फिर भी तुम, न जाने कहाँ गुम
१४/११/२०११
मधु अरोरा
Wednesday, November 30, 2011
कभी
कभी सुबह में
कभी रात में
कभी गर्मी में
कभी बरसात में
कभी सच में
कभी झूठ में
कभी दूर से
कभी पास से
कभी आस से
कभी विश्वास से
कभी दिल से
कभी रस्म-ओ-रिवाज़ से
मेरे हमसफ़र
मेरे हमनफस
कभी दिल-ओ-हाल मेरा
तू पूछता तो सही
मै जागती हूँ
या सोती हूँ
या तेरी याद में
दिन भर रोती हूँ
जिंदा हूँ साँस लेती हूँ
या कब्र में आराम से सोती हूँ
२९/११/२०११
मधु अरोरा
Sunday, November 27, 2011
अक्सर भूल जाते हैं
तुम्हारी याद से दिन निकलता है
तुम्हारी याद पर ख़त्म होता है
दिन का हर एक लम्हा
तुम्हारी याद में रोता है
तुम्हें याद कर के
सोचते हैं हम दिन भर
तुम्हें आज ये कहना है
तुम्हें आज वो कहना है
मगर जब सामने आते हो
और आँखों से मुस्कुराते हो
तुम्हें क्या क्या कहना है
हम सब कुछ भूल जाते हैं
न खुद का होश होता है
न कोई ख्वाब सोता है
फिर भी कहते हो तुम अक्सर
तुम्हें हम याद नहीं करते
तुम्हें कैसे समझाएं जानम
तुम्हारी यादों से हमे फुर्सत नहीं मिलती
मगर आती है ऐसी याद तुम्हारी
हम खुद को अक्सर भूल जाते हैं
२७/११/२०११
मधु अरोरा
Tuesday, November 22, 2011
Sunday, September 18, 2011
चाहत नाम है मेरा
चाहत नाम है मेरा
ख्वाइशों के मकां में रहती हूँ
सबकी ख्वाइशों में
जिंदा रहती हूँ
कभी भूल से भी अपनी
ख्वाइशों का ज़िक्र न करती हूँ
चाहत नाम है मेरा .........
हरेक की हर ख्वाइश का
ख्याल रखती हूँ
कोई मेरा ख्याल न करे
तो कुछ न कहती हूँ
चाहत नाम है मेरा .....
किसी को ख़ुशी मिले
तो मै खुश हो लेती हूँ
किसी को दुःख हो
तो मैं रो लेती हूँ
चाहत नाम है मेरा .....
न कोई गिला शिकवा
न शिकायत करती हूँ
चाहे कुछ भी हो
चुपचाप सह लेती हूँ
चाहत नाम है मेरा .....
लोग कहते हैं ये मनमानी है
पर मैंने सब के काम आने की ठानी है
सब को चाहना ही नियति है मेरी
पर बदले में कुछ न लेती हूँ
चाहत नाम है मेरा ......
१८/०९/२०११
मधु अरोरा
मधु अरोरा
Thursday, September 15, 2011
तो कैसा हो
जानती हूँ
फिर भी
जी चाहता है
तुम्हारे वक़्त से
मैं कुछ लम्हे चुरा लूं
तो कैसा हो
तुम मुस्कुराते कम हो
तुम्हारे हसीं लबों से
कुछ मुस्काने चुरा लूं
तो कैसा हो
तुम्हारी नज़र में
हर वक़्त कोई रहता है
मैं भी कुछ नज़रे चुरा लूं
तो कैसा हो
तुम सोते बहुत हो
तुम्हारी उनींदी आँखों से
मैं कुछ नीदें चुरा लूं
तो कैसा हो
यूं तुम बेवजह
रूठते बहुत हो
मै तुम्हारा रूठना चुरा लूं
तो कैसा हो
तुम प्यारे बहुत हो
तुम्हारा कुछ प्यार
मैं भी चुरा लूं
तो कैसा हो
तुम सोचते बहुत हो
तुम सोचते बहुत हो
तुम्हारे कुछ ख्याल
मैं भी चुरा लूं
तो कैसा ही
तुम बोलते बहुत हो
तुम्हारे बोले हुए
चंद अल्फाज़ मैं भी चुरा लूं
तो कैसा हो
१५/९/२०११
मधु अरोरा
Monday, September 12, 2011
Saturday, September 10, 2011
Friday, June 3, 2011
Tuesday, February 2, 2010
सिर्फ तुम

एक दिन अचानक
चले आओ
मेरे ख्वाबो से उतर के
मेरे आँगन को
महकाओ
मेरे आस पास
मेरे साथ साथ
तुम चलो यूं ही
मैं जाऊं जहाँ
तुम भी चलो वहीँ
मेरे पहलू में
चुपके से समां जाओ
मेरे पास हो तुम
मेरे साथ हो तुम
मेरी प्यास हो तुम
मेरी हर साँस हो तुम
मेरे लिए खास हो तुम
मेरे जीने की
वजह हो तुम
हर तरफ तुम ही तुम
ये एहसास सच है
यकीं हो मुझे
२९/०९/२००९
Tuesday, January 12, 2010
तुमको तो मेरी याद
Friday, December 18, 2009
फासले
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