Friday, June 3, 2011

दिलों की जंग



आंसुओ कि क्या बिसात थी
वो कुछ कह पाते
खामोश बह गये
दिलो की जंग मे

दर्द इतना गहरा था
की हम कुछ भी ना कह पाये
चुप चाप तकिया ले
सोने का बहाना कर लिया
५/३/२०११

Tuesday, February 2, 2010

सिर्फ तुम


एक दिन अचानक

चले आओ

मेरे ख्वाबो से उतर के

मेरे आँगन को

महकाओ

मेरे आस पास

मेरे साथ साथ

तुम चलो यूं ही

मैं जाऊं जहाँ

तुम भी चलो वहीँ

मेरे पहलू में

चुपके से समां जाओ

मेरे पास हो तुम

मेरे साथ हो तुम

मेरी प्यास हो तुम

मेरी हर साँस हो तुम

मेरे लिए खास हो तुम

मेरे जीने की

वजह हो तुम

हर तरफ तुम ही तुम

ये एहसास सच है

यकीं हो मुझे

२९/०९/२००९

Tuesday, January 12, 2010

तुमको तो मेरी याद






















तुमको तो मेरी याद
ना आएगी कभी
आयेगी भी तो
ना तडपायेगी कभी
गर आ ही जाये कभी
तो बस इतना करना
सामने किसी दर्पण के बैठ
खुद को संवारना
थोडा मुस्काना
थोडा इतराना
बालों की लट को
माथे पर बिखराना
थोडा सा सर को झटकाना
और मुझे
फिर से भूल जाना
२२/१०/२००९

Friday, December 18, 2009

फासले



रिश्तों को दरम्यान
कुछ फासले हो गए हैं
कभी तुम दूर थे
आज हम हो गए हैं
जो कल तक कहते थे
जी ना सकेंगे
आज खुद हमसे
जुदा हो गए हैं
ना जीने की तमन्ना है
ना मरने का गम
आज हम कैसे
इन्सान हो गए हैं
०१/०४/२००९

Wednesday, April 29, 2009

क्या चाहते हैं



आपने कहा
हम आते हैं
पर आप
आते आते
रह जाते हैं
कभी कहा
हम बुलाते हैं
पर हमे
बुलाते बुलाते
रह जाते हैं
न जाने आप
क्या चाहते हैं
हमारे सपनो की तरह
आप भी हमे
हर रोज़
धोखा दे जाते हैं
१५/०४/०९

Monday, April 13, 2009

तुम्हारी याद









बसंती हवा सी
अल्हड
बे खौफ
मदमस्त
चली आती है
याद तुम्हारी
महका जाती है
सांसें हमारी
बहुत मुश्किल है
समझ पाना
कौन ज़्यादा
महकता है
तुम्हारे लाये
रजनीगंधा के फूल
या फ़िर
याद तुम्हारी
१३/०४/०९

Thursday, February 26, 2009

फिर आया फागुन


फिर आया फागुन

फिर आया फागुन

रंगों की बहार लाया

गुब्बारे पिचकारी

गुझिया चकली

प्रेम प्यार बढाने आया

बेला जूही पलाश महके

अंग अंग में मस्ती छलके

अब तुम भी आ जाओ

मोहे पीली चुनरी दिला जाओ

फिर आया फागुन

फिर आया फागुन

तुम भी आ जाओ
२०/०२/०९

Tuesday, February 24, 2009

भुला न सकोगे




भुला न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं अक्सर तुम्हें याद आती रहूंगी
कभी ख्वाब बनकर कभी चाँद बनकर
मैं रातें तुम्हारी सजाती रहूंगी

पकड़ न सकोगे मुझे चाह कर तुम
मैं खुशबु सी फिजा में बिखर जाती रहूँगी
कभी साँस बनकर कभी हवा बनकर
मैं सांसें तुम्हारी सजाती रहूंगी

पा न सकोगे मुझे जीवन में तुम
मैं बार बार तुम्हें सताती रहूंगी
कभी दर्द बनकर कभी खुशी बनकर
मैं जीवन तुम्हारा महकाती रहूंगी
१०/०२/२००९

Thursday, February 12, 2009

याद

पानी का कतरा
आँख से
गिरे न गिरे
कोई आप को
याद करे न करे
हम वो शख्स हैं
जो आपको याद करेंगे
मरते दम तक भी

मौन भाषा

तुम्हें देख कर
अक्सर सोचा मैंने
तुम्हें देखा है कहीं
ख्वाब में
ख्याल में
या हकीकत में कहीं
या पिछले जनम कहीं
तुम्हारा चेहरा
कुछ पहचाना सा लगा
शब्द ढूंढती रही
पढने को
तुम्हारी आँखों की
मौन भाषा
१०/१२/२००८

Tuesday, January 27, 2009

क्यूँ नही आता


तुझे भुला के जिंदा रहूँ

वो लम्हा कभी नही आता

बसा है तू जो मेरी सांसों में

मेरी रूह में उत्तर क्यूँ नही जाता

अपने हाथों में मेरा हाथ लिये

तू वक्त क्यूँ नही बिताता

तू पास रहे मेरे हर वक्त

वो वक्त क्यूँ नही आता

जिस घड़ी तू पास हो मेरे

तब वक्त ठहर क्यूँ नही जाता

२६/०१/२००९

Saturday, January 17, 2009

मुश्किल


तुम्हारे मोहपाश में बंधकर
अपना
सब कुछ अर्पण कर
कितना
मुश्किल है
तुम्हें
भुला पाना
पर
उस से भी मुश्किल है
तुम्हें
मेरी याद दिलाना

बहुत
आसान सा है
हर
पल तुम्हें याद कर
तुम्हारे
ख्वाब आना
पर
उस से भी मुश्किल है
हर
रात को
नींद
का आना
१६/०१/२००९

Wednesday, December 17, 2008

सपना


हर पल लगे
तू
अपना
हर
रात से
सुबह
तक
ख्वाबों
का बुनु
सपना

पर
कैसे कहूँ
तुझे
अपना
जब
खो जाए
कहीं
तू
बन
के एक सपना
ख्वाबों
से
हकीकत
तक
हम
हों बस
तन्हा तन्हा २१/१०/२००८

जिंदगी की किताब


खुली रखी है ज़िन्दगी की किताब मैंने
जो
चाहो आप लिख दो
सुनती
ही आई हूँ आज तक
जो
चाहो तुम भी कह दो
हमेशा
ही रहूंगी तुम्हारी
जब
चाहो रखो या ठुकरा दो
धधक
रहे हैं शोले
बुझा
दो या हवा कर दो
क्या
खरीदने निकली थी याद नही
पर
आज तक बिकती ही आई हूँ
/१२/२००८

Thursday, October 9, 2008

लाज का कफ़न


ख्वाबो की तरह
हर लम्हा टूटती रही
आंसूंओं की तरह
तुम ज़िन्दगी से फिसलते रहे
परछाई की तरह
तुम्हें पकड़ती रही
यादों की तरह
ख़ुद को समेटती रही
हर खरीददार बोली लगता रहा
और सरे बाज़ार
प्यार बिकता रहा
कांच सा दिल
ठोकरों से टूट ता रहा
रेत की तरह हाथ से
ज़र्रा ज़र्रा बिखरता रहा
दर्द सीप में
मोटी सा क़ैद रहा
लाज काआँचल
दागदार होकर भी
अरमानो की लाश पर
कफ़न सा बिछता रहा
६/१०/२००८

Wednesday, October 8, 2008

अगले जन्म


तुम्हारी इक साँस पे

टिकी हैं

सांसें मेरी

तुम्हारी याद में

गुजरती हैं

रातें मेरी

कौन कहता है

की तू

मुझसे जुदा है

मेरे दिल में

रहती हैं

धड़कने तेरी

ये सच है की मिल न पाएंगे हम

इस जन्म
मिलने को लौटेंगे हम

फ़िर अगले जन्म

चलो कहीं दूर




लो कहीं दूर


ले चलो आज


जहाँ खोल सकें


दिल के सब राज़
ना रंज-ओ-गम की सियाही हो
ना हो माथे पर
कोई शिकन
ना हो दुनिया की फ़िक्र
ना पास हो कोई तनाव
चलो कहीं दूर ले चलो आज

क्यूँ है


यदि प्यार करते हैं सब


फ़िर सभी को प्यार की प्यास क्यूँ है


तुझसे मिलने की है एक तड़प


तो तुझसे बिछड़ के भी तड़प क्यूँ है


तुझे न मिल पाना एक मज़बूरी है


तो तुझे मिलना भी जरुरी क्यूँ है


तुझसे मिलने के हैं दिन कम


तो तुझसे बिछड़ने के दिन कम क्यूँ हैं


तुझसे मिलना एक खुशी है


तो मेरे हिस्से में ये उदासी क्यूँ है

Tuesday, October 7, 2008

तलाशी ले लो


तुम चाहे जितनी तलाशी ले लो


मेरे पास प्यार के सिवा कुछ भी नही


ये दिल जिसमें तुम बसते हो


मेरी धडकनों में धड़कते हो


इस दिल की तुम तलाशी ले लो


इस में तुम्हारी याद के सिवा कुछ भी नही


मेरे ख्वाबों में सिर्फ़ तुम बसते हो


हर तरफ़ तुम ही तुम दीखते हो इस आँखों की तुम तलाशी ले लो


इन में आंसुओं के सिवा कुछ भी नही


२७/१/२००८

Friday, October 3, 2008

लगता नही है दिल मेरा


बहुत उदास है दिल मेरा आज तेरे बिन

लगता नही है दिल मेरा आज तेरे बिन


बात करते करते रो देती हूँ

फिर कुछ सोच के हंस देती हूँ

कैसा है बावरा मन आज तेरे बिन

लगता नही है दिल मेरा आज तेरे बिन


न सोती हूँ न जगती हूँ

ख्वाबों में जैसे चलती हूँ

कभी आ के तो देख हाल मेरा आज तेरे बिन


बहुत उदास है दिल मेरा अज तेरे बिन

लगता नही है दिल मेरा आज तेरे बिन

०६/०४/२००८