Tuesday, March 26, 2013

होली मुबारक




















मुझसे कोसों दूर तुम
मेरी हर सोच से अंजान 
मेरे हर ख्याल में तुम 
मै तुम्हारे ख्याल में 
कहीं नहीं
फिर  भी चाहता है दिल
तुमसे ये कहना 
होली मुबारक हो जाना 

26/3/2013
©मधु अरोरा

Tuesday, December 4, 2012

अपना अपना दर्द


















कोई टूट कर चाहता है
कोई टूट कर बिखर जाता है 

अपना अपना दर्द है
अपना अपना तरीका 

कोई सिमट जाता है
कोई बिखर जाता है 

© मधु अरोरा 
2/12/12 

Thursday, October 4, 2012

मुझे एहसास रहने दो...


























न पोंछो आंसू मेरे
न मेरा दर्द बांटो तुम
मैं जिंदा हूँ अभी
मुझे एहसास रहने दो

आँखों में हलचल है
अभी कुछ अश्क बाकी हैं
सीने में धड़कन है
अभी कुछ साँस बाकी है

मुमकिन है तेरे दिल में
कोई अरमान बाकी हो
कोई खेल अधूरा हो
कोई हिसाब बाकी हो

कुछ काम बाकी हैं
कुछ फ़र्ज़ बाकी हैं
धरती का सीना है छोटा
कफ़न से बदन की दूरी बाकी है

जाने भी दो छोड़ो
अब ये बात रहने दो
मैं जिंदा हूँ अभी
मुझे एहसास रहने दो 

© मधु अरोरा
३०/९/२०१२ 

Sunday, July 22, 2012

रोशन हों तेरी रातें.....


























रोशन हों तेरी रातें
खुशियों का बसेरा हो
फिर चाहे जो भी
हाल मेरा हो

जलती रहे शमा
या दिल में अँधेरा हो
बंद हों जब आँखें
लबों पर नाम तेरा हो

बदन का कोई घाव
भरे या न भरे
लबों पर हो मुस्कान
सीने में दर्द गहरा हो

मुझे मिलें सारे रंज
तेरा मुस्कानों का सवेरा हो
तुझे हकीकत में वो मिले
जो सपने में तेरा हो

०१/०३/२००९
© मधु अरोरा

Thursday, July 19, 2012

अगर तुम मेरी ज़िन्दगी में न आये होते.....






















अगर तुम मेरी ज़िन्दगी में न आये होते
तो मैंने भी इतने ख्वाब न सजाये होते


रह लेती मै भी ज़िन्दगी भर तन्हा
अगर तुम न यूँ मुस्कुराये होते


मेरी भी रातों में रोज़ चाँद चमकता
आँखें खोलते ही रोज़ जो तुम नज़र आये होते 


यूँ तन्हा न होता ज़िन्दगी का सफ़र
इतने ठिकाने जो तुमने अपने न बनाये होते


१४/७/२०१२ 
मधु अरोरा

Tuesday, June 26, 2012

मै फिर अवतरित हो जाऊँगी



















मै फिर अवतरित हो जाऊँगी
एक नया रंग
नया रूप
नया जीवन लिए


जितनी बार भी तुम
मुझे, अपने अहम् की
धूल में रोंदोगे
तोड़ोगे और मिटाओगे


बीज बनकर
उगूंगी धरा से
वृक्ष बन के
बढ़ऊँगी और लहराऊँगी


छाया दूँगी
फल दूँगी
कर दूँगी सब 
तुम्हें समर्पण


तुम्हारे लिए थी
तुम्हारे लिए हूँ
तुम्हारे लिए रहूंगी
ये सच तुम जान जाओगे


२६/६/२०१२
मधु अरोरा

Friday, June 15, 2012

तू और मैं


























तू पानी
मैं प्यास ज़मीं की
बूँद बूँद मुझे
तुझमे समां जाने दे

मैं जेठ की तपती धूप 
तू छाँव दरख्तों की
मुझको तुझमे
पनाह लेने दे

तू गगन
मैं बादल तेरा
अपने रूप में मुझको
ढल जाने दे

तू चाँद
मैं चांदनी तेरी
मुझे तुझसे
निखर जाने दे

तू जिस्म
मैं रूह तेरी
मुझको तुझ से
मिल जाने दे

मधु अरोरा
१५/६/१२ 

Saturday, June 2, 2012

अभी ना आओ












अभी ना आओ के अभी साँस बाकी है 
जीने का अभी अरमान बाकी है 
ठहरो ,
अभी दर्द कहाँ है बड़ा हुआ
अभी बहुत काम है पड़ा हुआ
रुको,
अभी कुछ और इंतज़ार करो
अभी ना मुझसे प्यार करो
सुनो,
तब आना, जब मैं मिटटी में मिल जाऊं
धरती का कफ़न ओढ़ के सो जाऊं
२/६/२०१२

मधु अरोरा 

Friday, May 25, 2012

तुम्हारा नाम


























तमाम रात जाग कर
पलकों की किनोरों से
चाँद तारों पर
तुम्हारा नाम लिखा
सुबह हुई
धूप खिली
देखा तो सब धुल गया

२५/५/२०१२
मधु अरोरा 

Monday, May 21, 2012

तार तार हो गया


























खुद से भी
खुदा से भी
कहीं अहम् था वो रिश्ता
जब धुंधला और दिशाहीन हो गया
साथी बदलना जब
आधुनिकता का नाम हो गया
मोहब्बत ही जब 
एक देह बाज़ार हो गया
तो खुद मुझसे ही 
मेरा खुद का मेरा रिश्ता
तार तार हो गया 
२१/५/२०१२
मधु अरोरा 

Saturday, March 31, 2012

इक रोज़


गुजरते वक़्त के साथ मैं भी
इक रोज़ चली ही जाउंगी
सुनो, मेरे जाने के बाद
किसे दिखाओगे, वो तस्वीरें
जिन्हें संभाले रखे हो

अक्सर महरूम हूँ
मैं जिस आवाज़ से
किसे  सुनाओगे , वो आवाज़
जिसे चुप करवाते हो
अपनी ख़ामोशी से

रात भर जागती हैं 
जो दो आँखें 
तुम्हारे इंतज़ार में
बंद हो जाएँगी, वो कभी
फिर किसे इंतज़ार करवाओगे
२४/२/२०१२ 

मधु अरोरा 

Friday, March 16, 2012

ख्वाबों की चादर

















हर रात
तुम्हारे ख्यालों के
सतरंगी धागों से
ख्वाबों की चादर
बुनती हूँ
और फिर
उसी चादर को ओढ़ के
सो जाती हूँ
तुम्हारे ही खवाबों में 
खो जाती हूँ
सुबह होते ही
सब खवाब 
छू हो जाते हैं
मेरे ख्वाबों की चादर
फिर तार - तार हो जाती है
और फिर दिन भर
मैं उन्हें फिर से
बटोरती हूँ
और रात में जब
सब सो जाते हैं
मैं फिर से बुनने लगती हूँ
और फिर से ख्वाब सजाती हूँ
कुछ मेरे लिए
कुछ तुम्हारे लिए

१५/०३/२०१२ 
मधु अरोरा 

Saturday, December 31, 2011

नया साल

नया साल बदलने से अगर
और भी कुछ बदल जाता
तारीखें बदलने से अगर
इन्सान बदल जाता
बद्ल जाता वो सब कुछ
जो मानवता के लिए ठीक नहीं है
वो मानव हीनता बदल जाती
वो इन्सान बदल जाता
वो ह्रदय बदल जाता
वो इन्सान बदल जाता
वो नफरत बदल जाती
वो हृदयों की दूरियां
कम हो जाती
वो रिश्ते बदल जाते
जो निभाने मुश्किल हैं
वो संवेदनाएं बदल जाती
वो प्रण बदल जाता
बदल जाती सत्ता देश की
तो प्रगति बदल जाती
तो समझते नया साल ही नहीं
बहुत कुछ बदल गया
सिर्फ तारीखें बदलने से
कुछ नहीं बदल जाता

वो ही है सूरज
और वो ही है दिन
वो ही संवेदनहीन इंसान
वो ही टूटे रिश्तों का बोझ
वो ही दुःख
वो ही समस्याएँ
निरर्थक पीने नाचने से 
दुःख नहीं बदल जाता
सिर्फ बधाई देने से
मन नहीं  बदल जाता
सिर्फ नया साल आने से
कुछ नहीं बदल जाता
१/१/२०१२
मधु अरोरा 

Wednesday, December 21, 2011

वो

वो साथ हो तो मुझे नींद नहीं आती
वो दूर हो तो ये गम के 
जिसकी याद में जागती हूँ मै
वो मेरे बगैर सो गया होगा 
२१/१२/२०११
मधु अरोरा 

Tuesday, December 20, 2011

कल रात



कल रात भी चाँद आया था जमीं पर
अनंत खुशियों की रौशनी लेकर,
थी चांदनी कहीं पर
पर मेरे आँगन में सिर्फ अँधेरा था
२०/१२/२०११
मधु अरोरा 

Friday, December 16, 2011

सच है


जानती हूँ के तुमने मुझे
कभी पुकारा ही नहीं
फिर भी ये सच है
के रह रह के तुम बुलाते हो मुझे

है यकीं मुझे भी
के मैं तुमसे कभी मिली ही नहीं
फिर भी ये सच है
के मैं तुमसे जुदा भी नहीं

ये पागलपन है
या है दीवानापन
हुए हैं वो ही ख्वाब सच
जो हमने कभी बुने ही नहीं

कहने को है दूरी बहुत
या है मज़बूरी बहुत
सच है दिल से कभी
हम दूर हुए ही नहीं 
१५/१२/२०११ 
मधु अरोरा 

तुम

मेरा ख्वाब मेरा ख्याल तुम
मेरी सोच मेरा सवाल तुम

मेरा दिन मेरी रात तुम
आफ़ताब( sun) तुम 
माहताब (moon) तुम 

आगाज़ तुम, अंजाम तुम
मेरी जीत तुम मेरी हार तुम

मेरे अश्क मेरी मुस्कान तुम
मेरी भूख मेरी प्यास तुम

मेरे लफ्ज़ मेरा कलाम तुम 
हर लम्हा दिल के पास तुम

मेरी रूह मेरी जान तुम
मेरे जीने का अंदाज़ तुम

हर बात का एहसास तुम
मेरे लिए बहुत खास तुम 

हर तरफ बस तुम ही तुम
फिर भी तुम,  न जाने कहाँ गुम
१४/११/२०११
मधु अरोरा 

Wednesday, November 30, 2011

कभी




कभी सुबह में 
कभी रात में


कभी गर्मी में
कभी बरसात में


कभी सच में
कभी झूठ में


कभी दूर से
कभी पास से


कभी आस से
कभी विश्वास से


कभी दिल से
कभी रस्म-ओ-रिवाज़ से


मेरे हमसफ़र
मेरे हमनफस


कभी दिल-ओ-हाल मेरा
तू पूछता तो सही


मै जागती हूँ
या सोती हूँ


या तेरी याद में
दिन भर रोती हूँ


जिंदा हूँ साँस लेती हूँ
या कब्र में आराम से सोती हूँ 
२९/११/२०११ 
मधु अरोरा  

Sunday, November 27, 2011

अक्सर भूल जाते हैं



तुम्हारी याद से दिन निकलता है
तुम्हारी याद पर ख़त्म होता है
दिन का हर एक लम्हा
तुम्हारी याद में रोता है

तुम्हें याद कर के
सोचते हैं हम दिन भर
तुम्हें आज ये कहना है
तुम्हें आज वो कहना है

मगर जब सामने आते हो
और आँखों से मुस्कुराते हो
तुम्हें क्या क्या कहना है
हम सब कुछ भूल जाते हैं

न खुद का होश होता है
न कोई ख्वाब सोता है
फिर भी कहते हो तुम अक्सर
तुम्हें हम याद नहीं करते

तुम्हें कैसे समझाएं जानम 
तुम्हारी यादों से हमे फुर्सत नहीं मिलती
मगर आती है ऐसी याद तुम्हारी
हम खुद को अक्सर भूल जाते हैं
२७/११/२०११ 
मधु अरोरा 

Tuesday, November 22, 2011

दिल का दरवाज़ा




जब तेरे कदम कहीं और न डगमगाएं
जब तेरे दिल से बाकी सब उतर जाएँ

जब तुझे अचानक मेरी याद आ जाये
तेरे सीने का दिल मेरे लिए तड़प जाये

कोई रंजिश न दिल में रह जाये
जब सिर्फ मेरा बनने को जी चाहे

तब बेख़ौफ़ मेरी बाँहों में चले आना
दिल का दरवाज़ा खुला है सिर्फ तेरे लिए 
२३/११/२०११
मधु अरोरा